Hindi Poem of Bharat Bhushan Aggarwal “Jagte raho“ , “जागते रहो” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

जागते रहो
Jagte raho

डूबता दिन, भीगती-सी शाम
बन्द कर दो काम,
लो विश्राम ।

यह तिमिर की शाल
ओढ़ लो वसुधे! न सिकुड़े शीत से यह लाल,
जग का बाल ।

वलय की खनकार,
दीप बालो री सुहागिनी! जग उठे गृह-द्वार
बन्दनवार!

किन्तु साथी! देख
हम न सोएँगे, हमारा कार्य है अवशिष्ट
अपनी प्रगति का अब भी अधूरा लेख ।
जागरण, फिर जागरण ही है हमारा इष्ट!

लो, क्षितिज के पास —
वह उठा तारा, अरे! वह लाल तारा, नयन का तारा हमारा
सर्वहारा का सहारा
विजय का विश्वास ।

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