Hindi Poem of Alhad Bikaneri “Samay ka fer, “समय का फेर ” Complete Poem for Class 10 and Class 12

समय का फेर – अल्हड़ बीकानेरी

Samay ka fer – Alhad Bikaneri

 

कैसा क्रूर भाग्य का चक्कर
कैसा विकट समय का फेर
कहलाते हम- बीकानेरी
कभी न देखा- बीकानेर

जन्मे ‘बीकानेर’ गाँव में
है जो रेवाड़ी के पास
पर हरियाणा के यारों ने
कभी न हमको डाली घास

हास्य-व्यंग्य के कवियों में
लासानी समझे जाते हैं
हरियाणवी पूत हैं-
राजस्थानी समझे जाते हैं

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