Hindi Poem of Ashok Anjum “  Prem ki sachai ki boliya hi gayab he”,”प्रेम की, सचाई की, बोलियाँ ही गायब हैं” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

प्रेम की, सचाई की, बोलियाँ ही गायब हैं

 Prem ki sachai ki boliya hi gayab he

 

प्रेम की सच्चाई की बोलियां ही गायब हैं

आदमी के अंदर से बिजलियां ही गायब हैं

साबजी पधारे थे सैर को गुलिस्तां की

तब से इस चमन की सब तितलियां ही गायब हैं

हाथ क्या मिलाया था दिल ही दे दिया था उन्हें

हाथ अपने देखे तो उंगलियां ही गायब हैं

यूं ही गर्भ पे जो चली आपकी ये मनमानी

कल जहां से देखोगे ल़डकियां ही गायब हैं

वे भले प़डोसी थे, आए थे नहाने को

बाथरूम की तब से टौंटियां ही गायब हैं

चीर को हरण कैसे अब करोगे दुशासन

जींस में हैं पांचाली, सा़डयां ही गायब हैं

होटलों में खाते हैं वे चिकिनओबिरयानी

और कितने हाथों से रोटियां ही गायब हैं।

 

 

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