Hindi Poem of Ashok Vajpayee “  Adhpake amrud ki tarah prithvi”,”अधपके अमरूद की तरह पृथ्वी” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

अधपके अमरूद की तरह पृथ्वी

 Adhpake amrud ki tarah prithvi

 

खरगोश अँधेरे में

धीरे-धीरे कुतर रहे हैं पृथ्वी ।

पृथ्वी को ढोकर

धीरे-धीरे ले जा रही हैं चींटियाँ ।

अपने डंक पर साधे हुए पृथ्वी को

आगे बढ़ते जा रहे हैं बिच्छू ।

एक अधपके अमरूद की तरह

तोड़कर पृथ्वी को

हाथ में लिये है

मेरी बेटी ।

अँधेरे और उजाले में

सदियों से

अपना ठौर खोज रही है पृथ्वी

 

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