Hindi Poem of Balkrishan Rao “ Savdhan, jan nayak ”,”सावधान, जन-नायक” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

सावधान, जन-नायक

 Savdhan, jan nayak

 

सावधान, जन-नायक सावधान।

यह स्तुति का साँप तुम्हे डस न ले।

बचो इन बढ़ी हुई बांहों से

धृतराष्ट्र – मोहपाश

कहीं तुम्हे कस न ले।

सुनते हैं कभी, किसी युग में

पाते ही राम का चरण-स्पर्श

शिला प्राणवती हुई,

देखते हो किन्तु आज

अपने उपास्य के चरणों को छू-छूकर

भक्त उन्हें पत्थर की मूर्ति बना देते हैं।

सावधान, भक्तों की टोली आ रही है

पूजा-द्रव्य लिए!

बचो अर्चना से, फूलमाला से,

अंधी अनुशंसा की हाला से ,

बचो वंदना की वंचना से, आत्म रति से,

बचो आत्मपोषण से, आत्मा की क्षति से।

 

 

 

One Response

  1. Swati October 2, 2017

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