Hindi Poem of Bekal Utsahi “Hum ko yu hi pyasa chod”,”हम को यूँ ही प्यासा छोड़” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

हम को यूँ ही प्यासा छोड़

 Hum ko yu hi pyasa chod

हम को यूँ ही प्यासा छोड़

सामने चढ़ता दरिया छोड़

जीवन का क्या करना मोल

महंगा ले-ले, सस्ता छोड़

अपने बिखरे रूप समेट

अब टूटा आईना छोड़

चलने वाले रौंद न दें

पीछे डगर में रुकना छोड़

हो जाएगा छोटा क़द

ऊँचाई पर चढ़ना छोड़

हमने चलना सीख लिया

यार, हमारा रस्ता छोड़

ग़ज़लें सब आसेबी हैं

तनहाई में पढ़ना छोड़

दीवानों का हाल न पूछ

बाहर आजा परदा छोड़

बेकल अपने गाँव में बैठ

शहरों-शहरों बिकना छोड़

 

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