Hindi Poem of Bhawani Prasad Mishra “  Tum nahi samjhoge“ , “तुम नहीं समझोगे” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

तुम नहीं समझोगे

 Tum nahi samjhoge

 

इसलिए अपने किये पर

वाणी फेरता हूँ

और लगता है मुझे

उस पर लगभग पानी फेरता हूँ

तब भी नहीं समझते तुम

तो मैं उलझ जाता हूँ

लगता है जैसे

नाहक अरण्य में गाता हूँ

और चुप हो जाता हूँ फिर

लजाकर 

अपनी वाणी को

इस तरह स्वर से सजाकर!

 

 

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