Hindi Poem of Bhawani Prasad Mishra “ Vah nahi rahe honge “ , “बह नहीं रहे होंगे” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

बह नहीं रहे होंगे

Vah nahi rahe honge 

 

रेवा के किनारे-किनारे

उन दिनों के

हमारे शब्द

दीपों की तरह

पड़े तो होंगे मगर

पहुँच कर वे

अरब-सागर के किनारे पर

कंकरों और शंखो  और

सीपों की तरह!

 

 

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