Hindi Poem of Gopaldas Neeraj “ Hum teri chah me, ae yar vaha tak pahuche“ , “हम तेरी चाह में, ऐ यार ! वहाँ तक पहुँचे” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

हम तेरी चाह में, ऐ यार ! वहाँ तक पहुँचे

 Hum teri chah me, ae yar vaha tak pahuche

 

हम तेरी चाह में, ऐ यार! वहाँ तक पहुँचे ।

होश ये भी न जहाँ है कि कहाँ तक पहुँचे ।

इतना मालूम है, ख़ामोश है सारी महफ़िल,

पर न मालूम, ये ख़ामोशी कहाँ तक पहुँचे ।

वो न ज्ञानी ,न वो ध्यानी, न बिरहमन, न वो शेख,

वो कोई और थे जो तेरे मकाँ तक पहुँचे ।

एक इस आस पे अब तक है मेरी बन्द जुबाँ,

कल को शायद मेरी आवाज़ वहाँ तक पहुँचे ।

चाँद को छूके चले आए हैं विज्ञान के पंख,

देखना ये है कि इन्सान कहाँ तक पहुँचे ।

 

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