Hindi Poem of Ibne Insha “ Intjar ki rat”,”इंतज़ार की रात” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

इंतज़ार की रात

 Intjar ki rat

उमड़ते आते हैं शाम के साये

दम-ब-दम बढ़ रही है तारीकी

एक दुनिया उदास है लेकिन

कुछ से कुछ सोचकर दिले-वहशी

मुस्कराने लगा है- जाने क्यों?

वो चला कारवाँ सितारों का

झूमता नाचता सूए-मंज़िल

वो उफ़क़ की जबीं दमक उट्ठी

वो फ़ज़ा मुस्कराई, लेकिन दिल

डूबता जा रहा है – जाने क्यों?

 

 

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