Hindi Poem of Mira Bai “ Shri Radha mohan ji ko roop niharo, “श्रीराधा मोहनजीको रूप निहारो” Complete Poem for Class 10 and Class 12

श्रीराधा मोहनजीको रूप निहारो

 Shri Radha mohan ji ko roop niharo

 

श्रीराधा मोहनजीको रूप निहारो ॥ध्रु०॥

छोटे भैया कृष्ण बडे बलदाऊं चंद्रवंश उजिआरो ॥श्री०॥१॥

मोर मुगुट मकराकृत कुंडल पितांबर पट बारो ॥श्री०॥२॥

हलधर गीरधर मदन मनोहर जशोमति नंद दुलारी ॥श्री०॥३॥

शंख चक्र गदा पद्म विराजे असुरन भंजन हारो ॥श्री०॥४॥

जमुनाके नीर तीर धेनु चरावे वोढे कामर कारो ॥श्री०॥५॥

निरमल जल जमुनाजीको किनो नागनाथ लीयो कारो ॥श्री०॥६॥

इंद्र कोप चढे व्रज उपर नखपर गीरवर धारो ॥श्री०॥७॥

कनक सिंहासन जदुवर बैठे कोटि भानु उजिआरो ॥श्री०॥८॥

माता जशोदा करत आरती बार बार बलिहारो ॥श्री०॥९॥

सूरदास हरिको रूप निहारे जीवन प्रान हमारे ॥श्री०॥१०॥

 

 

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