Hindi Poem of Pratibha Saksena “  Shiv Vivah”,”शिव-विवाह” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

शिव-विवाह

 Shiv Vivah

 

गन सारे जुटि रहे आस-पासे, कइस औघड़ को दुलहा बनावे,

पूरो संभु को समाज आय ठाड़ो कोऊ जाने न लोक-वेवहारो!

घरनी बिन, रहे भूतन को डेरा रीत-भाँत कोऊ जाने ना अबेरा,

दौर-भागि करें चीज-वस्त पूरा, सो समेटि रहे भाँग और धतूरा,

बाट देखि रह्यो नांदिया  दुआरे  लै के डमरू भये संभु असवारे

चली भूत-प्रेत की जमात संगे,रूप सब को विरूप, विकल अंगे

सारे जग के अनाथ दई-मारे,  आय जुटे तबै संभु के दुआरे,

होहिं पूरन मनोरथ सुभ-काजे,  देइ-देइ के असीस संग लागे .

लहर लहर करे गंग की तरंगा, संभु खुदै झूमि रहे भंग-रंगा,

जटा -जूट जड़ी बाल-इन्दु लेखा,धार गजपट विचित्र वेष-भूषा.

ताल देई-देई डमरू बजावैं, मुंडमाल देखि जिया थरथरावे,

लै बरात संभु आय गे दुआरे, लहराय रहे नाग फन निकारे.

पुर लोग देखि दुलहा बिचित्तर, दौरि-दौरि के सुनावैं सब चलित्तर,

नाचें मगन मन भूत- प्रेत सारे,  डरि भागे लोग चकित नैन फारे.

परिछन के काज कनिया के वर की,  सासु आरती लै संग नार घर की ,

फुंकार नाग, गिरत-परत भागीं,  झनझनात गिर्यो  थाल अक्षतादि .

रोय नारद को कोसि रही मैना,दाढ़ी-जार विधि, तोहि नाहिं चैना .

संग बिटिया लै कूदि परौं गिरि ते, कइस रही साथ उमा अइस वर के

एक जोड़ा न जापै  एक लुटिया, केहि भाँति रहि पाई मोर बिटिया,!

विधि, रूप धारि आये इहि लागे, भाग जागि गा  तुम्हार  समुझावैं!

जोग धारे संभु अब लौं इकाकी, संजोग बन्यो  जइस दीप-बाती 

जेहि लागि उमा जन्म धरि तपानी, हाथ मांगे आयो महा-वरदानी,

आज विश्वनाथ  आय द्वार ठाड़ो, जस लेहु आपुनो  जनम सँवारो

गिरि, कन्या समर्पि देहु बर को, देवि पूरना,संपूरन करो हर को!

 

 

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