Hindi Poem of Ashniv Singh Chaohan “  Maa “ , “माँ” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

माँ

 Maa

 

खुशियों की क्रीम

परसने को

दुःखों का दही बिलोती है

पूरे अनुभव

एक तरफ हैं

मइया के अनुभव

के आगे

जब भी उसके

पास गए हम

लगा अँधेरे में

हम जागे

अपने मन की

परती भू पर

शबनम आशा की बोती है

घर की दुनिया माँ होती है

उसके हाथ का

रूखा-सूखा-

भी हो जाता

है काजू-सा

कम शब्दों में

खुल जाती वह

ज्यों संस्कृति की

हो मंजूषा

हाथ पिता का

खाली हो तो

छिपी पोटली का मोती है

घर की दुनिया माँ होती है

 

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