Hindi Poem of Balswaroop Rahi “  Gyan-Dhyan kuch kaam na aaye ”,”ज्ञान-ध्यान कुछ काम न आए” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

ज्ञान-ध्यान कुछ काम न आए

 Gyan-Dhyan kuch kaam na aaye

 

ज्ञान ध्यान कुछ काम न आए

हम तो जीवन-भर अकुलाए ।

पथ निहारते दृग पथराए

हर आहट पर मन भरमाए ।

झूठे जग में सच्चे सुख की

क्या तो कोई आस लगाए ।

देवालय हो या मदिरालय

जहाँ गए जाकर पछताए ।

तड़क-भड़क संतो की ऐसी

दुनियादार देख शरमाए ।

माल लूट का सबने बाँटा

हम ही पड़े रहें अलसाए ।

जो बिक जाता धन्य वही है

जो न बिके मूरख कहलाए ।

टिकट बाँटने के नाटक में

धूर्त महानायक बन छाए ।

शिष्टाचार भ्रष्टता दोनों—

ने अपने सब द्वैत मिटाए ।

जहाँ बिछी शतरंज वही ही

शातिर बैठे जाल बिछाए ।

अब के यूँ खैरात बँटी है

सारा किस्सा दिल बहलाए ।

दुर्जन पार लगाता नैया

सज्जन किसका काम बनाए ।

राही तो सीधे-सादे है

कौन भला क्या उनसे पाए ।

 

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