Hindi Poem of Bharatendu Harishchandra “ Hari Hui sab bhumi, “हरी हुई सब भूमि” Complete Poem for Class 10 and Class 12

हरी हुई सब भूमि

 Hari Hui sab bhumi

 

बरषा सिर पर आ गई हरी हुई सब भूमि

बागों में झूले पड़े, रहे भ्रमण-गण झूमि

करके याद कुटुंब की फिरे विदेशी लीग

बिछड़े प्रीतमवालियों के सिर पर छाया सोग

खोल-खोल छाता चले लोग सड़क के बीच

कीचड़ में जूते फँसे जैसे अघ में नीच

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