Hindi Poem of Bhawani Prasad Mishra “  Tumhari chaya me“ , “तुम्हारी छाया में” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

तुम्हारी छाया में

 Tumhari chaya me

 

याद भी बनी है जब तक

तब तक मैं

घुटने में सिर डालकर

नहीं बैठूँगा सिकुड़ा–सिकुड़ा

भाई मरण

तुम आ सकते हो

चार चरण

छलाँगें भरते मेरे कमरे में

मैं ताकूँगा नहीं

तुम्हारी तरफ़ डरते–डरते

आँकूँगा

जीवन की नयी कोई छाँव

तुम्हारी छाया में!

 

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