Hindi Poem of Dushyant Kumar “  Tumko niharta hu subha se ritambhara“ , “तुमको निहरता हूँ सुबह से ऋतम्बरा” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

तुमको निहरता हूँ सुबह से ऋतम्बरा

 Tumko niharta hu subha se ritambhara

 

तुमको निहारता हूँ सुबह से ऋतम्बरा

अब शाम हो रही है मगर मन नहीं भरा

ख़रगोश बन के दौड़ रहे हैं तमाम ख़्वाब

फिरता है चाँदनी में कोई सच डरा—डरा

पौधे झुलस गए हैं मगर एक बात है

मेरी नज़र में अब भी चमन है हरा—भरा

लम्बी सुरंग-से है तेरी ज़िन्दगी तो बोल

मैं जिस जगह खड़ा हूँ वहाँ है कोई सिरा

माथे पे हाथ रख के बहुत सोचते हो तुम

गंगा क़सम बताओ हमें कया है माजरा

 

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.