Hindi Poem of Raskhan’“Morpakha sir upar rakhiho, “मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं” Complete Poem for Class 10 and Class 12

मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं -रसखान

Morpakha sir upar rakhiho -Raskhan

 

मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं, गुंज की माल गरे पहिरौंगी।

 ओढ़ि पितम्बर लै लकुटी, बन गोधन ग्वारन संग फिरौंगी।।

 भावतो मोहि मेरो रसखान, सो तेरे कहे सब स्वाँग भरौंगी।

 या मुरली मुरलीधर की, अधरान धरी अधरा न धरौंगी।।

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