Hindi Poem of Bhawani Prasad Mishra “  Esa Ho Jata He“ , “ऐसा हो जाता है” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

ऐसा हो जाता है

 Esa Ho Jata He

 

जैसा आज हो गया

मेरा सदा मुट्ठी में

रहने वाला मन

चीरकर मेरी अंगुलियां

मेरे हाथ से निकल कर खो गया

गिरा नहीं है वह धरती पर

सो तो समझा हूँ

तब उड ही गया होगा वह

आसमान में

ढूंढूं कहां उसे इस बिलकुल

भासमान में

भटक रहा हूँ इसीलिए उसे खोजता हुआ

अबाबील में कोयल में सारिका में

चंदा में सूरज में मंगल में तारिका में!

 

 

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