Hindi Poem of Budhinath Mishra “ Loksabhas shoksabha dhari”,”लोकसभासँ शोकसभा धरि” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

लोकसभासँ शोकसभा धरि

 Loksabhas shoksabha dhari

महगू बाजल —

कते महगी आबि गेल छै!

दालि-चाउरमे तँ

आगि लागिए गेल छै ।

कथीसँ डिबीया लेसी

मटियाक तेलो

उड़नखटोला भ, गेल।

मुदा मन्त्रीजी नहि मानलनि ।

लुंगी उठा-उठा क’ देखबै छथि-

एहि विकासशील अर्थव्यवस्थामे

कते सस्त भ’ गेल छै

लोकक जान-परान

महानुभावक चरित्र

बेनगंन मौगीक शील ।

कतेक सस्त भ’ गेल छै

पंडिज्जीक पोथी-पतरा

गोसाउनिक गीत

चिनबारक माटि

आ टीवी चैनलक मौसगर मनोरंजन ।

मन्त्रीजी नहि देखा रहल छथि

ओ सुरंग जे लोकसभासँ शोकसभा धरि जाइ छै ।

ओ नहि देखा रहल छथि

नीलामी घर

जाहमे मैनोक पात बिकाइ छै

करोड़क करोड़मे!

ओ नहि देखा रहल छथि

बघनखा पहिरने हाथ

जे महानसँ महान योजनाक

मूड़ी पकड़ि क’ सौंसे चिबा जाइ छै ।

कुसियारक रस बटैछ सदनमे

आ सिट्ठी फेकाइछ

गामक माल-जालक आगाँ ।

लोक माल जकाँ

मरि रहल अछि

कि माल-जाल लोक जकाँ-

से कहब कठिन ।

 

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