Hindi Poem of Ghalib “Ugg raha hai dar-o-deevar se sabza Ghalib , “उग रहा है दर-ओ-दीवार से सबज़ा ग़ालिब ” Complete Poem for Class 10 and Class 12

उग रहा है दर-ओ-दीवार से सबज़ा ग़ालिब – ग़ालिब

Ugg raha hai dar-o-deevar se sabza Ghalib -Ghalib

 

उग रहा है दर-ओ-दीवार से सबज़ा ग़ालिब
हम बयाबां में हैं और घर में बहार आई है

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