Hindi Poem of Naresh Saksena “  Aukat”,”औकात” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

औकात

 Aukat

 

वे पत्थरों को पहनाते हैं लंगोट

पौधों को

चुनरी और घाघरा पहनाते हैं

वनों, पर्वतों और आकाश की

नग्नता से होकर आक्रांत

तरह-तरह से

अपनी अश्लीलता का उत्सव मनाते हैं

देवी-देवताओं को

पहनाते हैं आभूषण

और फिर उनके मन्दिरों का

उद्धार करके

उन्हें वातानुकूलित करवाते हैं

इस तरह वे

ईश्वर को

उसकी औकात बताते हैं ।

 

 

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