Hindi Poem of Sahir Ludhianvi “Sanadhwan e takdis e mishrak kaha he“ , “सनाख्वान-ए-तक्दीस-ए-मश्रिक़ कहाँ हैं?” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

सनाख्वान-ए-तक्दीस-ए-मश्रिक़ कहाँ हैं?

 Sanadhwan e takdis e mishrak kaha he

ये कूचे ये नीलाम घर दिलकशी के

ये लुटते हुए कारवां जिन्दगी   के

कहाँ हैं, कहाँ हैं, मुहाफ़िज़ ख़ुदी के?

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ये पुरपेंच गलियाँ, ये बेख़ाब बाज़ार

ये गुमनाम राही, ये सिक्कों की झंकार

ये इस्मत के सौदे, ये सौदों पे तकरार

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

तअफ्फ़ुन से पुर नीमरोशन ये गलियाँ

ये मसली हुई अधखिली ज़र्द कलियाँ

ये बिकती हुई खोखली रंगरलियाँ

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

वो उजले दरीचों में पायल की छन-छन

तनफ़्फ़ुस की उलझन पे तबले की धन-धन

ये बेरूह कमरों में खांसी की ठन-ठन

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ये गूंजे हुए क़हक़हे रास्तों पर

ये चारों तरफ़ भीड़-सी खिड़िकयों पर

ये आवाज़ें खींचते हुए आंचलों पर

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ये फूलों के गजरे, ये पीकों के छींटे

ये बेबाक नज़रें, ये गुस्ताख़ फ़िक़रे

ये ढलके बदन और ये मदक़ूक़ चेहरे

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ये भूखी निगाहें हसीनों की जानिब

ये बढ़ते हुए हाथ सीनों की जानिब

लपकते हुए पांव ज़ीनों की जानिब

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

यहां पीर भी आ चुके हैं जवाँ भी

तनूमन्द बेटे भी, अब्बा मियां भी

ये बीवी भी है और बहन भी है, माँ भी

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

मदद चाहती है ये हव्वा की बेटी

यशोदा की हमजिन्स राधा की बेटी

पयम्बर की उम्मत ज़ुलैख़ा की बेटी

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

ज़रा मुल्क के राहबरों को बुलाओ

ये कूचे ये गलियां ये मन्ज़र दिखाओ

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक को लाओ

सनाख़्वान-ए-तकदीस-ए-मशरिक कहाँ हैं?

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