Hindi Poem of Shiv Bahadur Singh Bhadoriya “ Badle Sandarbh”,”बदले सन्दर्भ” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

बदले सन्दर्भ

 Badle Sandarbh

 

लोकरीति की

पगरैतिन वह

अजिया की खमसार कहाँ है

हँसी ठहाके

बोल बतकही

सुन लेते थी

कही अनकही-

वही भेंट अँकवार कहाँ है

लौंग सुपारी

पानों वाली

ढोल मंजीरे

गानों वाली

लय की लोक विहार कहाँ है

बाल खींचते

अल्हड़ नाती

पोपले मुँह

आशीष लुटाती

ममता की पुचकार कहाँ है

 

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