Hindi Poem of Shiv Bahadur Singh Bhadoriya “  Shish-mor bandne laga phagun”,”शीश-मौर बाँधने लगा फागुन” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

शीश-मौर बाँधने लगा फागुन

 Shish-mor bandne laga phagun

 

आमों के शीश-

मौर बाँधने लगा फागुन ।

शून्य की शिलाओं से-

टकराकर ऊब गई,

रंगहीन चाह

नए रंगों में डूब गई,

कोई मन-

वृंदावन,

कहाँ तक पढ़े निर्गुन ।

खेतों से-

फिर फैली वासंती बाँहें,

गोपियाँ सुगंधों की,

रोक रही राहें,

देखो भ्रमरावलियाँ –

कौन-सी

बजाएँ धुन ।

बाँसों वाली छाया

देहरी बुहार गई,

मुट्ठी भर धूल, हवा,

कपड़ों पर मार गई,

मौसम में-

अपना घर भूलने लगे पाहुन ।

 

 

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