Hindi Poem of Shiv Bahadur Singh Bhadoriya “  Pakke ghar me kacche rishte”,”पक्के घर में कच्चे रिश्ते” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

पक्के घर में कच्चे रिश्ते

 Pakke ghar me kacche rishte

 

पुरखा पथ से

पहिये रथ से

मोड़ रहा है गाँव

पूरे घर में

ईटें-पत्थर

धीरे-धीरे

छानी-छप्पर

छोड़ रहा है गाँव

ढीले होते

कसते-कसते

पक्के घर में

कच्चे रिश्ते

जोड़ रहा है गाँव

इससे उसको

उसको इससे

और न जाने

किसको किससे

तोड़ रहा है गाँव

गरमी हो बरखा

या जाड़ा

सबके आँगन

एक अखाड़ा

गोड़ रहा है गाँव

 

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