Hindi Poem of Bashir Badra “ Raat ke saath raat leti thi”,”रात के साथ रात लेटी थी” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

रात के साथ रात लेटी थी

 Raat ke saath raat leti thi

रात के साथ रात लेटी थी

सुबह एक पालने में रोती थी

याद की बर्फपोश टहनी पर

एक गिलहरी उदास बैठी थी

मैं ये समझा के लौट आए तुम

धूप कल इतनी उजली उजली थी

कितने शादाब, कितने दिलकश थे

जब नदी रोज हमसे मिलती थी

एक कुर्ते के बाएँ कोने पर

प्यार की सुर्ख तितली बैठी थी

कितनी हल्की कमीज़ पहने हुए

सुबह अंगड़ाई लेके बैठी थी

 

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