Hindi Poem of Chandrasen Virat “Tum kabhi the surya”,”तुम कभी थे सूर्य” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

तुम कभी थे सूर्य

 Tum kabhi the surya

तुम कभी थे सूर्य लेकिन अब दियों तक आ गये।

थे कभी मुख्पृष्ठ पर अब हाशियों तक आ गये ॥

यवनिका बदली कि सारा दृष्य बदला मंच का ।

थे कभी दुल्हा स्वयं बारातियों तक आ गये ।।

वक्त का पहिया किसे कुचले कहां कब क्या पता।

थे कभी रथवान अब बैसाखियों तक आ गये ।।

देख ली सत्ता किसी वारांगना से कम नहीं ।

जो कि अध्यादेश थे खुद अर्जियों तक आ गये ।।

देश के संदर्भ मे तुम बोल लेते खूब हो ।

बात ध्वज की थी चलाई कुर्सियों तक आ गये ।।

प्रेम के आख्यान मे तुम आत्मा से थे चले ।

घूम फिर कर देह की गोलाईयों तक आ गये ॥

कुछ बिके आलोचकों की मानकर ही गीत को ।

तुम ॠचाएं मानते थे गालियों तक आ गये ॥

सभ्यता के पंथ पर यह आदमी की यात्रा ।

देवताओं से शुरु की वहशियों तक आ गये ॥

 

 

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.