Hindi Poem of Dhananjay singh “Jangal ug aaye”,”जंगल उग आए” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

जंगल उग आए

 Jangal ug aaye

भाव-विहग उड़ इधर-उधर

दुख दाने चुग आए

मन पर घनी वनस्पतियों के

जंगल उग आए

चीते-जैसे घात लगाए

कई कुटिलताएँ

मुग्ध हिरन की आँखों का

संवेदन समझाएँ

किस-किस बियाबान के कर्ज़े

जीवन भुगताए

हरे ताल की छाती पर

आ बैठी जलकुम्भी

और किनारे पर कँटिया ले

बैठे हो तुम भी

एक-एक पीड़ा के बाँटे

कितने युग आए

 

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