Hindi Poem of Ravindra Bharamar “Bandh liya Anjuri me“ , “बाँध लिए अँजुरी में” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

बाँध लिए अँजुरी में

 Bandh liya Anjuri me

बाँध लिए अँजुरी में-

जूही के फूल ।

मधुर गंध,

मन की हर एक गली महक गई,

सुखद परस,

रग-रग में चिनगी-सी दहक गई

रोम-रोम उग आए-

साधों के शूल ।

जोन्हा का जादू

जिन पंखुरियों था फैला,

छू गंदे हाथों-

मैंने उन्हें किया मैला,

हाथ काट लो-

मेरे…

सज़ा है क़बूल ।

आह!

हो गई मुझसे एक बड़ी भूल ।

अँजुरी में बाँध लिए जूही के फूल ।

 

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