Hindi Poem of Shriprakash Shukal “  Ret me sham”,”रेत में शाम” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

रेत में शाम

 Ret me sham

 

चल पड़ी नाव

धीरे-धीरे फिर संध्या आई

नदी नाव संयोग हुआ अब

मन में बालू की आकृतियाँ छाई

टूटा तारा

टूटी लहरें

टूटा बाट बटोही

टूट-टूट कर आगे बढ़ता

पीछे छूटा गति का टोही

चांद निराला

मुँह चमकाता

चमका-चमका कर मुँह बिचकाता

बचा हुआ जो कुछ कण था

आगे पीछे बहुत छकाता

आया तट

अब लगी नाव

लहरें हो गयी थेाड़ी शीतल

मन का मानिक एक हिराना

लहरों पर होती पल

हलचल!

 

 

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